एक समय कुछ गोपियां स्नान करने के लिए यमुना नदी पहुंची । स्नान से पूर्व नदी के तट पर भागवती जगत जननी माता की मूरत बना कर प्रार्थना में उनसे कृष्ण जैसा पति मागने लगी। फिर वहां 5 वर्षीय कृष्ण सीघ्र ही पहुंचे और माता भागवती की मूर्ति और गोपियां के बीच खड़े होकर गोपियां से नटखटता पूर्वक पूछने लगे " क्यों री वानरी क्या मांग रही थीं माता से " अभी तो प्रार्थना कर रही, फिर मेरे घर जाके मैया से शिकायत करेगी "कान्हिया मुझे परेशान करता है।" रूक आज तुझे मज़ा चखाता हूं। इतना सुनते ही सभी गोपियां वहां से भाग निकली और नदी में जाकर स्नान करने लगीं, नदी या कहीं भी नग्न होकर स्नान करना वेद विरुद्ध महापाप है। शास्त्रों में इसकी घोर निन्दा की गई है। और जल भगवान कृष्ण का ही एक तत्व स्वरूप है जिस प्रकार अग्नि वायु पृथ्वी आकाश कृष्ण का ही पंच तत्व स्वरूप होता है उसी तरह ये नदी सागर और जल भी श्री कृष्ण का रूप है। वो सर्व्यपत है जब नदी में गोपियां स्नान करने गई थीं तब किशोर अवस्था होने के कारण उसे ज्ञान नही था नग्न होकर नदी जल में स्नान करना महापाप है। चाहे वो छोटा बच्चा ही क्यों न हों। भगवान कृष्ण ढूढते हुए नदी के किनारे पहुंचे गोपियों के कपड़े देखे उस कपड़े को छुपा दिया। स्वयं अंतर्ध्यान हो गए। जब गोपियां स्नान कर बाहर निकली तो उसके कपडे गायब थे अब वो शर्म के मारे नदी में फिर प्रवेश हो गई और जगत जननी माता से प्रार्थना करने लगी। क्योंकि कृष्ण सिर्फ विष्णु अवतार ही नही थे वो माता पार्वती का भी अवतार था । अर्थात परमात्मा तत्व एक ही है अनेक नही। जब गोपियां प्रार्थना कर थक गई कुछ भी संकेत न मिला तब उसे कृष्ण कभी जल में दिखते तो कभी पेड़ की टहनियों पर कभी नदी के तट पर दिखते और उनके साथ उसके कपडे।
अब वो कृष्ण से क्षमा मागने लगी की अब से वो दुबारा ऐसा अपराध नही करेगी। शास्त्रविरुद्ध कर्म का त्याग करेगी । क्षमा का भाव आते ही उसके कपडे जहां वो रखी उसी स्थान पर फिर से पड़ा हुआ मिला।
गोपियों को ज्ञान हो गया की परमात्मा चरण को वो तभी प्राप्त कर सकेगी जब वो शास्त्र विरुद्ध कर्म का त्याग करेगी। अन्यथा जन्म जन्मांतर तरह तरह के अंजाने में पाप के बंधन के कारण संसार बंधन भी बना रहेगा शास्त्र विरुद्ध कर्म करते हुए जीव कभी पाप से मुक्त नही हो सकता। उसे एक दिन परमात्मा की शरण जाना ही होगा।

You are right bro 💯% sachhi baat batayi hai
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