बुधवार, 9 अगस्त 2023

हरि जी प्रेम भक्ति

हरि जी तुम्हे बार बार नमस्कार जो तुमने सभी प्रेमी जनो को अपने चरणो को प्रेमभक्ति प्रदान किया । मां वृजेश्वरी श्री राधिके तुम्हे अन्नत कोटि नमस्कार जो तुमने सभी प्रेमीजनों को अपने चरणो की भक्ति प्रदान की.... मां भगवती दुर्गा तुम्हे बार बार अन्नत कोटि दंडवत नमस्कार जो तुमने सभी प्रेमी जनो की कलयुगी प्रांपचो से रक्षा की .... माता कृष्ण माता राधिके माता दुर्गे माता गोपी तुम्हे आगे से नमस्कार तुम्हे पीछे से नमस्कार तुम्हे सब रूप में नमस्कार जो तुमने सभी प्रेमी जनो को अपने चरणो की भक्ति प्रदान की... माता तुम ही सर्वात्मा सव्रेश्वरी तुम शिवा हो तुम शिव हो तुम ही आदि अनादि और मध्य हो तुम ही आदि अंत से रहित अन्नता हो। माता तुम ही जगत का संचालन करने वाली हो तुम ही अनंत सृष्टि को धारण करने वाली हो । माता तुम ही सभी जीवो रूप में स्थित हो तुम गौरी लक्ष्मी माता सरस्वती गंगा गोदावरी यमुना तथा सर्वदेव सर्वदेवी महादेव महादेवी हो । माता मैं तेरा गुणानग कहां से प्रारम्भ करू तुम ही वासुदेव सर्वम हो तुम ही राधा सर्वम और दुर्गा सर्वम हो । माता मुझे हर स्वांस से वायु के स्थान पर तेरा नाम ही नाम निकले माता मैं हर जन्म तेरा रहू। माता मुझ पर बस तेरा अधिकार हो माता मेरी श्रद्धा बस तेरे चरणो में रहे । माता मुझे मणिद्वीप गोलोक वैकुंठ लोक कुछ नही चाहिए मैं तो तेरे चरणो के प्रेम का प्यासा हूं माता मुझे अपने चरणो की प्रेम भक्ति दो । माता मुझे ज्ञान विज्ञान प्राण कुछ नही चाहिए । मुझे तो बस तेरे साथ रहने का वरदान चाहिए । माता मुझे मुक्ति शक्ति सिद्धी आदि कुछ नही चाहिए मुझे तो बस तेरे भक्तो का दुःख संकट विपत्ति अपने सर पे चाहिए । माता तुम ही अपने भक्तो रूप में स्थित है मैं तो तेरा उदंड बालक हूं । सब को परेसान करने वाला हूं संतो झगड़ने वाला हूं । पर जैसा भी हूं तेरा हूं भीतर से संतो और तेरे भक्तो के चरणो का दास हूं । माता मुझे कुछ नही चाहिए । मुझे तो बस तुम्हारे भक्तो को आदर सम्मान प्रेम देने वाली बुद्धि चाहिए । माता तुम जहां कही भी हो तुम्हे हर हृदय में पुकार पुकार कर तुझे बुला लूंगा । अब तुम मुझ से आंख मिचोलिया खेलना बंद करो मेरा हाल अब तेरे बिना बेहाल है । माता तू ही दरिद्र सुदामा का कृष्ण हो तुम ही हनुमान के रामचंद्र जानकी हो तुम ही मेरे गोबिंद श्री राधा आदिगुरु महादेव हो । माता तुम ही जल अग्नि चंद्र सूर्य गगन पशु पक्षी असुर सुर देव दानव और इन सबसे पड़े परब्रह्म स्वरूप हो । हे सर्वेशरी जगतीश्वरी परमेश्वरी भक्तवत्सला मैं जन्मों जन्मों तुम्हे ध्याऊंगा फिर तू मेरी इक्षा के अनुसार नही मिलने वाली है जब तेरी इक्षा होगी तभी मिलने वाली है अर्थात मैं तेरा पुत्र होकर भी अनाथ ही सिद्ध हुवा । माता तुम तो मैया द्रोपदी के बुलाने पा आ गई थी तुम तो गजराज को बुलाने पर आ गई थी ध्रुव प्रह्लाद के बुलाने पर आ गई थी पर मेरे नैन तेरा दर्शन कब करे तू ही जाने .... हे हरि मैं तो तेरा नाम ही जानता हूं। मैं तुम्हे ही माता पिता भाई बहन मित्र गुरु साधु संत और जगत स्वरूप में जनता हूं मैं पूजा पाठ तीर्थ स्नान कर्म काण्ड यज्ञ आदि करना कुछ नही जानता बस तेरे प्रेम और दुलार रस का भूखा हूं । करुणा माइ गोबिंद दया करो माता कृपा करो माता मुझे इस दुर्गम संसार में तेरे सिवाय और कौन समझ सकते हैं । माता इस दुर्गम संसार से पार तेरे साथ ही जाना चाहता हूं तेरे साथ ही रहना चाहता हूं । माता तुम जहां कही भी छुपी हो आने की कृपा करो । ❤️🙏🌷 – श्री राम भक्त राहुल झा

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