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बुधवार, 9 अगस्त 2023

प्यारे गोबिंद

[08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: प्रेम स्वरूप कृष्ण करुणा स्वरूप कृष्ण दया स्वरूप कृष्ण क्षमा स्वरुप कृष्ण सरल स्वरूप कृष्ण संतोष स्वरूप कृष्ण सत्य स्वरूप कृष्ण । 🙏🙏🙏🌷🌷🌷♥️♥️♥️ [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: भूमि स्वरूप कृष्ण जल स्वरूप कृष्ण अग्नि स्वरूप कृष्ण वायु स्वरूप कृष्ण आत्मा स्वरूप कृष्ण पीपल रूप कृष्ण । 🙏🙏🙏🌷🌷🌷♥️♥️♥️ [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: भक्त जैसा भी हो सब भगवान के प्यारे हैं। हरे राम हरे हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। 🙏मैं भगवान में हूं। 🙏 [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: हरि सचिदानंद स्वरूप है हरि सत स्वरूप है हरि ही सत पुरुष है। हरि ही असत स्वरूप है । हरि ही पूर्ण ब्रह्म है हरि परम् ब्रह्म स्वरूप है । 🙏🙏🙏 [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: भगवान दया और क्षमा के मूरत हैं । वो सब पर कृपा करते हैं भगवान सब के स्वामी हैं। अपमान करने वाले सम्मान करने वाले सुख दुख देने वाले सब में भगवान है भगवान में सब है। उनसे पड़े कुछ नही है। [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: हरि सचिदानंद स्वरूप है हरि सत स्वरूप है हरि ही सत पुरुष है। हरि ही असत स्वरूप है । हरि ही पूर्ण ब्रह्म है हरि परम् ब्रह्म स्वरूप है । 🙏🙏🙏 [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: बस जहां रहे वहां हरि के सिवाय कुछ भी स्मरण न रहे । हरि का दास हरि पर आश्रित है। क्योंकि एक हरि ही सत है और सब कुछ असत है । [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: विकार अविकार से पार निर्विकार , गति दुर्गति से पार अविगत , ब्रम्ह आदि ब्रम्ह से पार ब्रम्हतीत , आदि अंत से पार आनादि , जन्म मरण से पार अजन्मा ( विदेह) , व्यापी अव्यापी से पार सर्वव्यापी सनातन परमात्मा🙏 [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: बस जहां रहे वहां हरि के सिवाय कुछ भी स्मरण न रहे । हरि का दास हरि पर आश्रित है। क्योंकि एक हरि ही सत है और सब कुछ असत है । [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: हरि स्वयं अपनी इक्षा से संसार चला रहा है वो हर स्थान में है । हरि सभी में है सब कोई हरि में है। हरि के सिवाय कुछ नही है । ऐसे हरि को सभी रूपो में प्रणाम 🙏 [08/08, 9:36 am] श्रीरामभक्त वत्स: हे अनादि अंत से रहित हे सब के स्वामी गोबिंद हे अंतर्यामी करोड़ो जीभ से भी तेरा नाम लिया जाए करोड़ो बार नाम लिया जाय और सोचे मैं इतनी बार जप कर लूंगा तो तेरी प्राप्ति हो जाएगी । मैं अपनी मेहनत से भगवान की प्राप्ति कर लूंगा ये जीवो का झूठा अहंकार है इस अहंकार से तुम्हारा कोई अता पता भी नही लगा सकता ....जब तक तू स्वयं नही दया करता तब तुम्हे कोई प्राप्त नही कर सकता। कई योगी ध्यान लगा कर तेरा पता लगा रहे हैं कई संत बनकर मन में विकार लिए प्रवचन दे रहें कोई पंथ की माया जाल में तेरी महिमा गाकर दूसरे पंथ की निंदा कर रहे हैं कोई जोड़ जोड़ से चिल्ला कर तेरे नाम का नमाज अदा कर रहे हैं कोई समाधि लगा बैठा है । हे जगत पालक यदि मन यही अहंकार लिए मैं तेरी वंदना करू तो तू भी मेरी नही सुनेगा । मैं सदा तेरे आश्रय लिया है मैं हे माधव रघुनंदन तू जैसे नचाता है मैं वैसे नाचता हूं । मुझ से तेरी शक्ति के बीना कुछ भी नही हो सकता । इस संसार में छोटा बड़ा श्रेष्ठ सर्व श्रेष्ठ की फैसला तेरे दरबार में ही होता है । तू सभी के हृदय में स्थित जानने वाला है।

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